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गुरुवार, मार्च 3
सुरसरिता गंगा की धारा
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सुरसरिता गंगा की धारा सुरसरिता गंगा की धारा उतरी नभ से छल-छल कल-कल तार दिये जाने कितने नर अनगिन उर कर डाले निर्मल ! बची राख न शेष कालिमा ...
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