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सोमवार, मई 23
तू आनंद प्रेम का सागर
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तू आनंद प्रेम का सागर तू ही मार्ग, मुसाफिर भी तू तू ही पथ के कंटक बनता, तू ही लक्ष्य यात्रा का है फिर क्यों खुद का रोके रस्ता ! मस्ती की...
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बुधवार, दिसंबर 15
नव गीत जब रचने को है
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नव गीत जब रचने को है कैद पाखी क्यों रहे जब आसमां उड़ने को है, सर्द आहें क्यों भरे नव गीत जब रचने को है ! सामने बहती नदी ताल बन कर क्यों ...
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