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सोमवार, फ़रवरी 7
टूटी विस्मृति मन की
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टूटी विस्मृति मन की ओंउम् की पुकार उठी हुई जागृत रग-रग तन की रेशा रेशा लहराया टूटी विस्मृति मन की ! श्वासों की डोर चली मन पतंग हो उठा तोड़ ...
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