मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
शुक्रवार, फ़रवरी 11
चलन दुनिया का
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चलन दुनिया का जग का पहिया झूठ से चलता भागे कोसों सच से डरता, सदा मुखौटा ओढ़े रहता पाखंडों पर ही यह पलता ! जाने किसका मह...
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गुरुवार, फ़रवरी 10
हँसना मना है
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ए जी,खायेंगे न ? “ए जी, चलेंगे न” की जब श्रीमती ने लगाई पांचवी बार गुहार तो झकमार, जूता पहन, श्रीमान हो गए सांध्य भ्रमण को तैयार ! साथ ...
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बुधवार, फ़रवरी 9
आत्मा का वस्त्र
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आत्मा का वस्त्र वह ठंड से कांप रही थी सिकुड रही थी, ठिठुर रही थी उस दिन मैंने उसे बर्फीले बियाबान में सिसकते देखा, याद है मुझे उस दिन मैंने...
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सोमवार, फ़रवरी 7
सरस्वती पूजा भाती
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सरस्वती पूजा भाती माघ मास के शुक्ल पक्ष की तिथी पंचमी जब आती, खिलते दिगंत, आता वसंत सरस्वती पूजा भाती ! विद्या, बुद्धि, ज...
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टूटी विस्मृति मन की
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टूटी विस्मृति मन की ओंउम् की पुकार उठी हुई जागृत रग-रग तन की रेशा रेशा लहराया टूटी विस्मृति मन की ! श्वासों की डोर चली मन पतंग हो उठा तोड़ ...
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शनिवार, फ़रवरी 5
पुण्य सम पावन यह प्यार
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पुण्य सम पावन यह प्यार अनसुनी जाने न पाए मीत की कोई पुकार, कौन जाने कब मिलेगी झूमती गाती बहार ! कौन जाने कब खिलेगा पुण्य सम पावन यह प्य...
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शुक्रवार, फ़रवरी 4
आया वसंत
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आया वसंत नव वसंत की नई भोर का तन-मन में जागी हिलोर का उल्लसित हो करें स्वागत ! नयी प्रीत हो नयी रीत हो नव ऊर्जा से रचा गीत हो, नया जोश...
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गुरुवार, फ़रवरी 3
इसलिए कुछ ठंड ज्यादा आज है
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इसलिए कुछ ठंड ज्यादा आज है शीत लहरी है कंपाती हाड़ को कटकटाते दांत जब पाला पड़े, शाम से पहले धुंधलका छा गया सूर्य निकले सर्दियों में दिन चढ़...
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बुधवार, फ़रवरी 2
कुछ इधर की कुछ उधर की
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कुछ इधर की कुछ उधर की लोकतंत्र लोकतंत्र का हुजूर असल अर्थ है यही लोग अपने हों यदि, तन्त्र अपना हो गया ! जान पहचान के हैं हजार फायदे अर्जिय...
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मंगलवार, फ़रवरी 1
कर्म से कर्मयोग
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कर्म से कर्मयोग चींटी से हाथी तक राजा से रंक तक, मूर्ख से विद्वान तक सभी रत हैं कर्म में ! श्वास लेते, उठते, बैठते रोते-हँसते, चलते-फिरते,...
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सोमवार, जनवरी 31
हँसना मना है !
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मुकरियाँ हर बंधन को बुरा बतावे अपनी मर्जी ही चलवावे सांसत में सब आये पालक क्यों सखी साजन, न सखी बालक ! ठूंस-ठूंस कर चारा खाए अपनी खिदमत खू...
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