मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

मंगलवार, दिसंबर 26

नया वर्ष आने वाला है

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नया वर्ष आने वाला है शब्दों में यदि पंख लगे हों उड़ कर ये तुम तक जा पहुँचें , छा जाएँ इक सुख बदली से भाव अमित जो पल-पल उमगे...
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मंगलवार, दिसंबर 19

जो कहा नहीं पर सुना गया

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जो कहा नहीं पर सुना गया शब्दों में ढाल न पाएँगे जो जाम पिलाये मस्ती के , कुदरत बिन बोले भर देती मृदु मौन झर रहा अम्बर से ! ...
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शुक्रवार, दिसंबर 15

कितनी धूप छुए बिन गुजरी

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कितनी धूप छुए बिन गुजरी कितना नीर बहा अम्बर से कितने कुसुम उगे उपवन में, बिना खिले ही दफन हो गयीं कितनी मुस्कानें अंतर में...
20 टिप्‍पणियां:
बुधवार, नवंबर 15

अभी समय है नजर मिलाएं

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  अभी समय है नजर मिलाएं नया वर्ष आने से पहले नूतन मन का निर्माण करें , नया जोश , नव बोध भरे उर नये युग का आह्वान करें ! ...
1 टिप्पणी:
गुरुवार, नवंबर 9

एक निपट आकाश सरीखा

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एक निपट आकाश सरीखा नयन खुले हों या मुँद जाएँ जीवन अमि अंतर भरता है , मन सीमा में जिसे बांधता वह उन्मुक्त सदा बहता है !...
1 टिप्पणी:
बुधवार, अक्टूबर 25

मौसम

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मौसम मौसम आते हैं जाते हैं वृक्ष पुनः-पुनः बदला करते हैं रूप हवा कभी बर्फीली हो चुभती है कभी तपाती.. आग बरसाती सी.. शुष्क है...
10 टिप्‍पणियां:
रविवार, अक्टूबर 22

एक दीप बन राह दिखाए

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एक दीप बन राह दिखाए अंतर दीप जलेगा जिस पल तोड़ तमस की कारा काली , पर्व ज्योति का सफल तभी है उर छाए अनन्त उजियाली ! एक दीप ...
9 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, अक्टूबर 13

जिन्दगी हर पल बुलाती

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जिन्दगी हर पल बुलाती किस कदर भटके हुए से राह भूले चल रहे हम, होश खोया बेखुदी में लुगदियों से गल रहे हम ! रौशनी थी, था ...
7 टिप्‍पणियां:
बुधवार, अक्टूबर 11

सुख-दुःख

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सुख-दुःख  सुख की तृष्णा एक भ्रम ही तो है दुःख की पकड़ ही असली चीज दुःख अपने होने का सबूत देता है सुख है खुद को मिटाने की तरकी...
6 टिप्‍पणियां:
सोमवार, अक्टूबर 9

लीला एक अनोखी चलती

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लीला एक अनोखी चलती  सारा कच्चा माल पड़ा है वहाँ अस्तित्त्व के गर्भ में.... जो जैसा चाहे निर्माण करे निज जीवन का ! मह...
3 टिप्‍पणियां:
सोमवार, सितंबर 25

एक पुहुप सा खिला है कौन

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एक पुहुप सा खिला है कौन  एक निहार बूँद सी पल भर किसने देह धरी, एक लहर सागर में लेकर किसका नाम चढ़ी ! बिखरी बूँद लहर डूब...
9 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, सितंबर 22

अब नया-नया सा हर पल है

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अब नया-नया सा हर पल है अब तू भी याद नहीं आता अब मस्ती को ही ओढ़ा है , अब सहज उड़ान भरेगा मन जब से हमने भय छोड़ा है ! वह भी...
5 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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