मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

शनिवार, अगस्त 2

जीवन एक अदृश्य ज्योति सा

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जीवन एक अदृश्य ज्योति सा  कोई कहीं तलाश न करता  भीतर न सवाल कोई शेष,  नहीं राग अब सुख का उर में  रह नहीं गया दुखों से द्वेष ! एक खेल सा जीवन...
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शुक्रवार, अगस्त 1

है और नहीं

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है और नहीं  जो ‘है’  वह कहने में नहीं आता  जो ‘नहीं है’  वह दिल में नहीं समाता  जो ‘होकर’ भी ‘न हो’ जाये  जो ‘न होकर’ भी दिल को लुभाये  वही ...
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सोमवार, जुलाई 28

अंश

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अंश  सुबह-सुबह जगाया उसने  कोमलता से,  छूकर मस्तक को, जैसे माँ जगाती है  अनंत प्रेम भरे अपने भीतर  याद दिलाने, तुम कौन हो ? उसी के एक अंश  उ...
12 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, जुलाई 25

गूँज किसी निर्दोष हँसी की

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गूँज किसी निर्दोष हँसी की  खन-खन करती पायलिया सी  मधुर रुनझुनी घुँघरू वाली,  खिल-खिल करती हँसी बिखरती  ज्यों अंबर से वर्षा होती !   अंतर से ...
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मंगलवार, जुलाई 22

सत्य और भ्रम

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सत्य और भ्रम  माना कदम-कदम पर बाधायें हैं  मोटी-मोटी रस्सियों से अवरुद्ध है पथ आसक्ति के जालों में क़ैद  मन आदमी का  न जाने कितने भयों से ह...
13 टिप्‍पणियां:
बुधवार, जुलाई 16

ढाई आखर सभी पढ़ रहे

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ढाई आखर सभी पढ़ रहे  प्रेम अमी की एक बूँद ही जीवन को रसमय कर देती,   दृष्टि एक आत्मीयता की  अंतस को सुख से भर देती !  प्रेम जीतता आया तबसे  ज...
17 टिप्‍पणियां:
सोमवार, जुलाई 14

सत्य

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सत्य  सत्य है  अखंड, एकरस जानने वाला  जान रहा प्रतिपल   नहीं है भूत या भविष्य  उसके लिए  वहाँ कोई भेद नहीं  न दिशाओं का  न गुणों का  भावातीत...
11 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, जुलाई 11

‘को’ नहीं ‘की’

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‘को’ नहीं ‘की’  हम भगवान ‘को’ मानते हैं  भगवान ‘की’ नहीं मानते ! भगवान ‘को’ मानते हैं   पर हम चलाते अपनी हैं   भगवान ‘की’ मानने से  निष्काम ...
10 टिप्‍पणियां:
रविवार, जुलाई 6

अब

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अब  चीजें अब साफ़ हो गयीं   अंधेरा छँटने लगा है  पहचान रहा मन मंज़िल को जो भ्रमित करता रहा है   पकड़ी है प्रकाश की डोरी जीवन जैसे एक किताब क...
14 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, जुलाई 4

ऊपर-नीचे जग है क्रीड़ा

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ऊपर-नीचे जग है क्रीड़ा गहराई में जाकर देखें  एक धरा से उपजे हैं सब,  ऊँचाई पर बैठ निहारें  सूक्ष्म हुए से खो जाते तब ! रहे धरा पर उसको  पीड़...
8 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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