मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
शुक्रवार, अगस्त 29
बादल है तो बरसेगा ही
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बादल है तो बरसेगा ही बादल है तो बरसेगा ही खेत किसी का सरसेगा ही, भरा हुआ है जो अभाव से ऐसा मन तो तरसेगा ही ! जल अध गगरी छलकेगा ही व्यर्...
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मंगलवार, अगस्त 26
शुभता के प्रतीक गणनायक
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शुभता के प्रतीक गणनायक गणपति हैं जन-जन के नायक हर घर-आँगन में बस जाते, नृत्य, गायन, साज-सज्जा के जाने कितने ढंग सिखाते ! पाहन, माटी, काष...
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सोमवार, अगस्त 25
जीवन बीता ही जाता है
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जीवन बीता ही जाता है ज्वालामुखी दबे हैं भीतर काश ! हमें सावन मिल जाता, रिमझिम-रिमझिम बूँदों से फिर अंतर का उपवन खिल जाता ! बाहर अंबर बरस...
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शुक्रवार, अगस्त 22
नई मंज़िल का पता पा
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नई मंज़िल का पता पा दूर हों अज्ञान से हम कामनाएँ मिट रहें, स्वयं में ही तृप्त हो मन कोई अभाव न खले ! किसी क्षण में वह परम मिल उसी पथ ...
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रविवार, अगस्त 17
कृष्ण की याद
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कृष्ण की याद जैसे कोई फूल खिला हो अमराई में जैसे कोई गीत सुना हो तनहाई में जैसे धरती की सोंधी सी महक उठी हो जैसे कोई वनीय बेला गमक र...
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शुक्रवार, अगस्त 15
पंख मिले इसके सपनों को
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भारत के उन्यासिवें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाओं सहित रोक सकेगा नहीं विश्व यह भारत के बढ़ते कदमों को, विश्व आज पीछे चलता है पंख...
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बुधवार, अगस्त 13
प्रकृति के सान्निध्य में
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प्रकृति के सान्निध्य में भोर की सैर श्रावण पूर्णिमा की सुहानी भोर छाये आकाश पर बादल चहूँ ओर प्रकृति प्रेमी एक छोटे से समूह ने कब्बन प...
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शनिवार, अगस्त 9
चलते जाना ही है मंज़िल
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चलते जाना ही है मंज़िल भेद-भाव सारे ऊपर हैं नीचे सम-रसता की धारा, जाति, धर्म ओढ़े ऊपर से नहीं बनें वे दुर्गम कारा ! कलम हाथ में अगर न था...
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बुधवार, अगस्त 6
दुनिया तो बस इक दर्पण है
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दुनिया तो बस इक दर्पण है फूलों की सुवास बिखरायें या फिर तीखे बाण चलायें, शब्द हमारे, हम ही सर्जक हमने ही तो वे उपजाए ! चेहरा भी व तन का हर...
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