मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

शुक्रवार, नवंबर 7

अँधेरा और प्रकाश

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अँधेरा और प्रकाश   अंधेरे में बदल जाती हैं चीजें  जो है  वह नहीं दिखायी देता  जो नहीं है  वह नयी शक्लें धर लेता है  अंधेरा भय जगाता है  अंधे...
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बुधवार, नवंबर 5

चाह जब जागे मिलन की

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चाह जब जागे मिलन की  निज आत्म में जागना है  न कि जगत से भागना है,  मिला बाहर, वही भीतर  नहीं अब कुछ माँगना है ! भाव अपना शुद्ध हो जब  प्रेम ...
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रविवार, नवंबर 2

पाया नहीं पार कुछ

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पाया नहीं पार कुछ  खूब मथा, बिलोया खूब निकला न सार कुछ  दूध नहीं पानी था !!  खूब धुना, काता खूब निकला न धागा कुछ  कपास नहीं काठ था !! खूब ढू...
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गुरुवार, अक्टूबर 30

वही थाम लेता राहों में

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वही थाम लेता राहों में  कोई लिखवा जाता है ज्यों  जहाँ कलम, कागज सम्मुख है,  अक्षर भरते से जाते हैं  मौन सदा, जो जगत प्रमुख है ! वही शब्द है ...
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बुधवार, अक्टूबर 22

जीवन एक सुवास अनोखी

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जीवन एक सुवास अनोखी  ह्रदय शुद्ध हो  भाव विमल हों  मन भी खाली-खाली अपना  जीवन जैसे कोई लीला  या फिर भोर काल का सपना ! चाह न जागे  लौ जब लागे...
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मंगलवार, अक्टूबर 21

शुभ दीपावली

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शुभ दीपावली  दीप जले आशा के  अंतर अभिलाषा के,  जगमग यह जगत हुआ  भेद मिटे भाषा के ! ख़ुशियों की लड़ियों में  रंगीं फुलझड़ियों में,  दिल ही ज्...
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शुक्रवार, अक्टूबर 17

उड़ें गगन में मुक्त हुए से

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उड़ें गगन में मुक्त हुए से निज नूतन नीड़ की ख़ुशी में  असली घर भी याद रहेगा ? आज नहीं तो कल जाना है  ‘जाओ’ यह संसार कहेगा ! ह्रदयहीन तब लगता...
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बुधवार, अक्टूबर 15

मुक्ति और पीड़ा

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मुक्ति और पीड़ा  नहीं है ज्ञात, कुछ भी  अज्ञात बहुत भारी है  सृष्टि चला रहा है कौन  किसने की प्रलय की तैयारी है?  कौन पीड़ा के बीज बोता  कौन...
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रविवार, अक्टूबर 12

क्योंकि तुम ख़ुशी के परमाणुओं से बने हो

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क्योंकि तुम ख़ुशी के परमाणुओं से बने हो  जिसमें प्रेम के परमाणु भी हैं  या वे बदल जाते हैं प्रेम में  कई आयामी हैं वे  जैसे प्रकाश की एक श्व...
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गुरुवार, अक्टूबर 9

देवियाँ

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देवियाँ  सीता, धरा की पुत्री  भूमिजा है  भूमि सिखाती है, कर्म का वर्तन  ! सहज ही आता है  उनके वंशजों को  भू, जल, और पर्वतों का   संरक्षण ! ल...
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सोमवार, अक्टूबर 6

चक्र से बाहर

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चक्र से बाहर  आने दो यादों के बादल  छाने दो भावों के बादल,  वर्तमान का नभ अनंत है  तिरने दो शब्दों के बादल ! उड़ें हवा संग, हों काफ़ूर  बहकर...
14 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, अक्टूबर 3

तू ही भरे रंग माया के

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तू ही भरे रंग माया के भाव सभी अर्पित करते हैं  प्रेम और करुणा जो तुझसे,  पल-पल इस जग में झरते हैं  कष्ट हमारा हर हरते हैं ! मधुर तृप्ति का भ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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