मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

सोमवार, नवंबर 17

रामायण - मिथक से परे इतिहास की झलक - २

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रामायण - मिथक से परे इतिहास की झलक  (दूसरा भाग) २५ अक्तूबर २०२५  आज कई दर्शनीय स्थल देखने के बाद हम त्रिंकोमल्ली पहुँचे हैं। यहाँ हमारा निव...
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गुरुवार, नवंबर 13

रामायण - मिथक से परे इतिहास की झलक

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रामायण - मिथक से परे इतिहास की झलक  २३ अक्तूबर २०२५ आज हम श्रीलंका में हैं। इस देश का नाम किस भारतीय ने नहीं सुना है? रामायण की कथा में रावण...
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मंगलवार, नवंबर 11

जीवन राग

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जीवन राग  मिट जाते हैं सारे द्वन्द्व  झर जाता है हर विरोध  ख़त्म हो जाता है सदा के लिए संघर्ष  जब नत मस्तक होता है मन (तेरे सम्मुख) खो जाती ...
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शुक्रवार, नवंबर 7

अँधेरा और प्रकाश

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अँधेरा और प्रकाश   अंधेरे में बदल जाती हैं चीजें  जो है  वह नहीं दिखायी देता  जो नहीं है  वह नयी शक्लें धर लेता है  अंधेरा भय जगाता है  अंधे...
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बुधवार, नवंबर 5

चाह जब जागे मिलन की

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चाह जब जागे मिलन की  निज आत्म में जागना है  न कि जगत से भागना है,  मिला बाहर, वही भीतर  नहीं अब कुछ माँगना है ! भाव अपना शुद्ध हो जब  प्रेम ...
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रविवार, नवंबर 2

पाया नहीं पार कुछ

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पाया नहीं पार कुछ  खूब मथा, बिलोया खूब निकला न सार कुछ  दूध नहीं पानी था !!  खूब धुना, काता खूब निकला न धागा कुछ  कपास नहीं काठ था !! खूब ढू...
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गुरुवार, अक्टूबर 30

वही थाम लेता राहों में

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वही थाम लेता राहों में  कोई लिखवा जाता है ज्यों  जहाँ कलम, कागज सम्मुख है,  अक्षर भरते से जाते हैं  मौन सदा, जो जगत प्रमुख है ! वही शब्द है ...
20 टिप्‍पणियां:
बुधवार, अक्टूबर 22

जीवन एक सुवास अनोखी

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जीवन एक सुवास अनोखी  ह्रदय शुद्ध हो  भाव विमल हों  मन भी खाली-खाली अपना  जीवन जैसे कोई लीला  या फिर भोर काल का सपना ! चाह न जागे  लौ जब लागे...
10 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, अक्टूबर 21

शुभ दीपावली

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शुभ दीपावली  दीप जले आशा के  अंतर अभिलाषा के,  जगमग यह जगत हुआ  भेद मिटे भाषा के ! ख़ुशियों की लड़ियों में  रंगीं फुलझड़ियों में,  दिल ही ज्...
15 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, अक्टूबर 17

उड़ें गगन में मुक्त हुए से

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उड़ें गगन में मुक्त हुए से निज नूतन नीड़ की ख़ुशी में  असली घर भी याद रहेगा ? आज नहीं तो कल जाना है  ‘जाओ’ यह संसार कहेगा ! ह्रदयहीन तब लगता...
12 टिप्‍पणियां:
बुधवार, अक्टूबर 15

मुक्ति और पीड़ा

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मुक्ति और पीड़ा  नहीं है ज्ञात, कुछ भी  अज्ञात बहुत भारी है  सृष्टि चला रहा है कौन  किसने की प्रलय की तैयारी है?  कौन पीड़ा के बीज बोता  कौन...
8 टिप्‍पणियां:
रविवार, अक्टूबर 12

क्योंकि तुम ख़ुशी के परमाणुओं से बने हो

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क्योंकि तुम ख़ुशी के परमाणुओं से बने हो  जिसमें प्रेम के परमाणु भी हैं  या वे बदल जाते हैं प्रेम में  कई आयामी हैं वे  जैसे प्रकाश की एक श्व...
13 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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