मन पाए विश्राम जहाँ
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अजनबी
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मंगलवार, अप्रैल 6
कोरोना काल
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कोरोना काल यह भय का दौर है आदमी डर रहा है आदमी से गले मिलना तो दूर की बात है डर लगता है अब तो हाथ मिलाने से घर जाना तो छूट ही गया था ...
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शनिवार, जून 15
कुछ ऐसा है कि
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कुछ ऐसा है कि आँखें बाहर देखती हैं मन संसार की सुनता है कान शब्दों में डूबे हैं और वह भीतर बैठा है ! फिर इसमें कैस...
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मंगलवार, दिसंबर 6
बस वही खिल मुस्कराया
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बस वही खिल मुस्कराया एक रिश्ता दोस्ती का फलसफा यह जिंदगी का, खूबसूरत सा जहाँ यह एक नाता हो ख़ुशी का ! अजनबी बनकर रहा जो भेंट...
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