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शनिवार, फ़रवरी 1

आया वसंत

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आया वसंत चल  सखि !  देखें, सरसों फूली  हर्षाया उर , हर गम भूली ! हुलस उठी बगिया देखो ना  नव यौवन वृक्षों पर आया  लतर हरी भयीं भर-भर फूलीं  ग...
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गुरुवार, जून 19

मधुर अमराई में बदले

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मधुर अमराई में बदले थामता है हर घड़ी वह जो बरसता प्रीत बनकर, खोल देता द्वार दिल के फिर सरसता गीत बन कर ! हर नुकीले रास...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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