अमराई लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अमराई लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, फ़रवरी 1

आया वसंत



आया वसंत

चल  सखि !  देखें, सरसों फूली 

हर्षाया उर , हर गम भूली !


हुलस उठी बगिया देखो ना 

नव यौवन वृक्षों पर आया 


लतर हरी भयीं भर-भर फूलीं 

गाया मन ने,  हर ग़म भूली !


चल  सखि !  देखें, सरसों फूली 


भँवरे गुन-गुन गायें फागुन 

कोकिल, मोर, पपीहा टेरें 


अमराई की गंध समो ली 

 हर्षाया उर, हर गम भूली !


चल  सखि !  देखें, सरसों फूली

गुरुवार, जून 19

मधुर अमराई में बदले


मधुर अमराई में बदले


थामता है हर घड़ी वह
जो बरसता प्रीत बनकर,
खोल देता द्वार दिल के
फिर सरसता गीत बन कर !

हर नुकीले रास्ते को
मृदु गोलाई में बदले,
कंटकों से जो भरी थी
मधुर अमराई में बदले !

मरहम रखता दर्द हरता
हर कदम पर साथ देता,
पोंछ देता दुःख इबारत
या नये से अर्थ देता !

बूंद बनकर जो मिला था
सिन्धु सा वह बढ़े आता,
रोशनी की इक किरण था
बन उजाला चढ़े आता !

दूर से था जो पुकारे
बस गया है दिल में आके,
डाल डेरा और डंडा
पा गया हो ज्यों ठिकाने !