मन पाए विश्राम जहाँ
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अमी
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सोमवार, जुलाई 5
जैसे कोई द्वार खुला हो
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जैसे कोई द्वार खुला हो भीतर-बाहर सभी दिशा में बरस रहा वह झर-झर-झर-झर, पुलक उठाता होश जगाता भरता अनुपम जोश निरंतर ! जैसे कोई द्वार खुला हो ...
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मंगलवार, दिसंबर 6
जैसे कोई द्वार खुला हो
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जैसे कोई द्वार खुला हो भीतर-बाहर, सभी दिशा में बरस रहा वह झर-झर, झर-झर, पुलक उठाता, होश जगाता भरता अनुपम जोश निरंतर ! जैसे कोई द्वार खुल...
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