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शुक्रवार, मार्च 27

नेह घट सजाने हैं

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नेह घट सजाने हैं आशा के नहीं आस्था के दीप जलाने हैं आकाश कुसुम नहीं श्रद्धा पुष्प खिलाने हैं, हर लेंगे तम, जो भर देंगे सुवास मन ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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