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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
आतंक
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आतंक
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गुरुवार, अप्रैल 24
पहलगाम में आतंक
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पहलगाम में आतंक कातर असीम दुख से हर भारतीय का ह्रदय उबल रहा हर मन क्रोध और बेबसी से देख आतंक का ऐसा भयावह रूप नम हैं करोड़ों आँखें ...
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सोमवार, दिसंबर 31
नए वर्ष की दास्तान
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नए वर्ष की दास्तान कैसे कहें शुभ हो नव वर्ष जब की बिछी है सामने जाते हुए वर्ष की खून से लथपथ देह पिछले वर्ष भी तो यही कहा था ...
6 टिप्पणियां:
गुरुवार, जुलाई 28
बहुत रुलाते हैं
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नार्वे, लीबिया हो या अफगानिस्तान, या अपना भारत, हर देश के निर्दोष आज हिंसा का शिकार हो रहे हैं.... जाने कब होगा इसका अंत.... बहुत रुलात...
12 टिप्पणियां:
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