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सोमवार, जून 22
दिन-एक उपहार
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दिन-एक उपहार मिला है उपहार की तरह दिन आज का लिपटा हुआ एक चमकीले आवरण में हम मुग्ध हैं उसी पर खोलना नहीं चाहते रख देते हैं आलमारी म...
3 टिप्पणियां:
मंगलवार, मई 4
चेतन भीतर जो सोया है
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चेतन भीतर जो सोया है बीज आवरण को ज्यों भेदे धरती को भेदे ज्यों अंकुर, चेतन भीतर जो सोया है पुष्पित होने को है आतुर ! चट्टानों को काट उमड़...
15 टिप्पणियां:
सोमवार, फ़रवरी 17
सोये हैं हम
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सोये हैं हम... बस जरा सी बात इतनी सुख की चादर ओढ़ मन पर खोये हैं हम सोये हैं हम ! एक सागर रौशनी का पास ही कुछ दूर बहत...
10 टिप्पणियां:
मंगलवार, मई 8
मैं तुम और प्रेम
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मैं तुम और प्रेम मै, तुम और प्रेम एक ही शै के तीन नाम हैं जिनसे पनपी हैं सारी सभ्यताएं अतीत से भविष्य तक बांधता है एक ही सूत्...
11 टिप्पणियां:
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