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इश्क
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इश्क
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बुधवार, जनवरी 20
कुछ ख्याल
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कुछ ख्याल ‘कुछ’ होने से ‘कुछ नहीं’ हो जाना इश्क का इतना सा ही तो फ़साना चुप रहकर ही यह बयां होता है आवाजों में बस रुसवा होता है सुनो, ...
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शनिवार, नवंबर 30
छिपा अरूप रूप के पीछे
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छिपा अरूप रूप के पीछे इश्क में जो भी डूबा यारा बहती भीतर अमृत धारा, जब-जब उस से लगन लगाई जल जाती हर झूठी कारा ! जब कण-कण...
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बुधवार, फ़रवरी 14
इश्क की दास्ताँ
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इश्क की दास्ताँ उसने दिए थे हीरे हम कौड़ियाँ समझ के जब नींद से जगाया रहे करवटें बदलते ओढ़ा हुआ था तम का इक आवरण घना सा ...
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सोमवार, जुलाई 25
बोले मियां लाल बुझक्कड़
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बोले मियां लाल बुझक्कड़ अपना हाल बुरा है यारों अपना हाल बुरा लूट लिया है जग वालों ने दिल का हाल बुरा ! छोटे थे तो घरवालों की खूब धुनाई खा...
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