मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
उजास
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उजास
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सोमवार, जुलाई 7
अब
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अब बहुत हुआ खेल, अब चलो कुछ काम की बातें कर लें उससे पहले कि पर्दा उठ जाये उससे दोस्ती बना लें कहीं ऐसा न हो, खो जाये ...
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सोमवार, मार्च 31
बन जाये मन स्वयं उजास
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बन जाये मन स्वयं उजास झर जाता है कुम्हलाया पुष्प धरा पर आहिस्ता से जैसे बिखर जाती है पाँखुरी-पाँखुरी सहजता से विलग हो डा...
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शुक्रवार, अक्टूबर 1
रह-रह कर भीतर वंशी धुन
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रह-रह कर भीतर वंशी धुन बिखरा है बन कर उजास मिलता है तू श्वास-श्वास कहाँ समेटूँ कहाँ समोऊँ पूछ रहा मन ले उच्छ्वास ! पलकों में मुस्कान छिपी ...
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