मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
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रविवार, अक्टूबर 4
अस्तित्त्व और हम
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अस्तित्त्व और हम एक हवा का झोंका भी आकर उसकी खबर दे जाता है दूर गगन में उगता हुआ साँझ का तारा उसकी याद से भर जाता है बादलों में बना ...
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सोमवार, अप्रैल 3
एक रहस्य
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एक रहस्य थम जाती है कलम बंद हो जाते हैं अधर ठहर जाती हैं श्वासें भी पल भर को लिखते हुए नाम भी... उस अनाम का नजर भर कोई देख ल...
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मंगलवार, सितंबर 22
जीवन ! कितना पावन !
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जीवन ! कितना पावन ! सदा अछूता ! कोमल शतदल सरवर में ज्यों खिला कमल हो, राजहंस या तिरता कोई दूर गगन तक उड़ सकता हो ! नन्ही बू...
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बुधवार, जनवरी 29
जीवन का गीत
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जीवन का गीत हर तरफ है शोर भीड़ और दुःख का साम्राज्य... बहते हुए अश्रु, सिसकियाँ और अर्थहीन आवाजें जीवन जैसे एक खोल में सिमट आय...
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सोमवार, जून 13
कुदरत न घूंघट खोलती
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कुदरत न घूंघट खोलती जो घट रहा सब स्वप्न है क्यों दिल जलाते हो यहाँ, जो दिख रहा वह है नहीं क्यों घर सजाते हो यहाँ ! है ओस की एक बूंद जो...
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शनिवार, अप्रैल 16
पुष्प बिखेरे सुरभि सुवासित
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पुष्प बिखेरे सुरभि सुवासित ओस की मोती जैसी बूंदें सजा गयी हैं कोमल तन को, सद्यस्नात पुष्प अति मनहर भा जाता हर निर्मल मन को ! खिलकर कृत-कृ...
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