मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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बुधवार, जून 17

मंज़िल और रास्ते

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मंज़िल और रास्ते जिसने जाना, जो भी जाना  वह कहा नहीं जा सकता  जो कहा गया है  वह मार्ग की खबर देता है  मंज़िल की नहीं  वहाँ तो ख़ुद ही जाना ह...
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शुक्रवार, अक्टूबर 14

बूंद जैसे ओस की हो

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बूंद जैसे ओस की हो जल रही है ज्योति भीतर तिमिर पर घनघोर छाया, स्रोत है अमृत का सुखकर किन्तु मन तृप्ति न पाया ! औषधि के घट भरे हैं वृक्ष स...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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