मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
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शनिवार, जून 15
कुछ ऐसा है कि
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कुछ ऐसा है कि आँखें बाहर देखती हैं मन संसार की सुनता है कान शब्दों में डूबे हैं और वह भीतर बैठा है ! फिर इसमें कैस...
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