मन पाए विश्राम जहाँ

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मंगलवार, जून 11

मन से कुछ बातें

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मन से कुछ बातें कितने दिन और यहाँ घूमोगे , गाओगे भटके हो बार-बार कब तक झुठलाओगे ?  एक न एक.. दिन घर तो आओगे ! स्वाद लिए ...
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मंगलवार, अप्रैल 2

माया की माया

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माया की माया जो देख सकती है, वह आँख नहीं जानती भले-बुरे का भेद जो देख नहीं सकती, वह आत्मा   सब जानती है, फिर भी गिरती है गड्ढ...
6 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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