मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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बुधवार, फ़रवरी 9

सच

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सच   यहाँ अपना कुछ भी नहीं है  काया यह कुदरत से मिली    मन माया भी जिसमें खिली  भाषा ज्ञान मिला जगत से  जग से ही पाया जब सब कुछ यहाँ खोना कु...
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मंगलवार, मार्च 9

नीलगगन सी विस्तृत काया

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नीलगगन सी विस्तृत काया  एक शून्य है सबके भीतर एक शून्य चहुँ ओर व्यापता,  जाग गया जो भी पहले में  दूजे में भी रहे जागता ! शून्य नहीं वह अंधका...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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