मन पाए विश्राम जहाँ
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काया
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काया
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बुधवार, फ़रवरी 9
सच
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सच यहाँ अपना कुछ भी नहीं है काया यह कुदरत से मिली मन माया भी जिसमें खिली भाषा ज्ञान मिला जगत से जग से ही पाया जब सब कुछ यहाँ खोना कु...
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मंगलवार, मार्च 9
नीलगगन सी विस्तृत काया
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नीलगगन सी विस्तृत काया एक शून्य है सबके भीतर एक शून्य चहुँ ओर व्यापता, जाग गया जो भी पहले में दूजे में भी रहे जागता ! शून्य नहीं वह अंधका...
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