मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
केंद्र
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केंद्र
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मंगलवार, मई 19
अभी और यहाँ
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अभी और यहाँ क्या तुम हो? हाँ, इससे कौन इंकार करेगा अपना होना तो सबने जाना है ! क्या तुम यहाँ हो ? इसमें शक है तुम कहीं भी हो सकते हो चं...
8 टिप्पणियां:
शुक्रवार, अप्रैल 18
केंद्र और परिधि
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केंद्र और परिधि परिधि पर ही खड़ा हो कोई तो याद केंद्र की भूले-भटके ही आती है मिल जाये जीवन का केंद्र तो परिधि फैलती चली जाती है ! परिधि ...
6 टिप्पणियां:
मंगलवार, फ़रवरी 18
चाह
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चाह स्वयं को केंद्र मानकर दूसरे को चाहना पहली मंजिल है जो हर कोई पा लेता है दूसरे को केंद्र मानकर स्वयं को समर्पित कर देना दूसरी मंज़िल ह...
14 टिप्पणियां:
गुरुवार, मई 8
आना-जाना
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आना-जाना न कोई किसी से दूर जाता है न कोई किसी के पास आता है, स्वयं से दूर और स्वयं के पास हर मानव यहाँ आता-जाता है ! क...
10 टिप्पणियां:
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