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नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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सोमवार, मार्च 7

युद्ध की विभीषिका

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युद्ध की विभीषिका  जो खेल सकते थे  रंगों की होली    वे खून की होली खेल रहे हैं  हथियारों और सत्ता मद में चूर कुछ लोग  उन्हीं को रौंदते जा रह...
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सोमवार, दिसंबर 31

नए वर्ष की दास्तान

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नए वर्ष की दास्तान कैसे कहें शुभ हो नव वर्ष जब की बिछी है सामने जाते हुए वर्ष की खून से लथपथ देह पिछले वर्ष भी तो यही कहा था ...
6 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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