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गुलाब
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गुलाब
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सोमवार, जून 1
निजता
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निजता किसी को, कुछ और नहीं होना है जो, जो है, वही होकर, स्वयं को संजोना है गुलाब, गुलाब रहकर ही महकेगा कमल जल में ही चहकेगा निजता को पह...
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बुधवार, जून 29
सच क्या है
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सच क्या है सच सूक्ष्म है जो कहने में नहीं आता सच भाव है जो शब्दों में नहीं समाता सच एकांत है जहाँ दूसरा प्रवेश नहीं पाता सच सन...
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बुधवार, जून 3
नई नकोर कविता
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नई नकोर कविता बरसती नभ से महीन झींसी छू जाती पल्लवों को आहिस्ता से ढके जिसे बादलों की ओढ़नी झरती जा रही फुहार उस अमल अम्बर ...
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मंगलवार, नवंबर 18
हरियाली का गांव अनोखा
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हरियाली का गांव अनोखा खिले गुलाब, मालती, बेला, फुदक रहा खगों का मेला रह-रह गूंजे कलरव मद्धम, कहीं भ्रमर का अविरत सरगम I ह...
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गुरुवार, अप्रैल 24
गुलाब और वह
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गुलाब और वह पूछा गुलाब से उसकी ख़ुशी का राज काँटों में भी मुस्कुराने का देख अनोखा अंदाज रंगो-खुशबू की कर रहा था अनायास ही...
11 टिप्पणियां:
बुधवार, जुलाई 6
साक्षीभाव
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साक्षीभाव संवेदनाओं का ही तो खेल है चल रहा है छल इन्हीं का... संवेदनाएं, जो घटतीं हैं मन की भूमि पर और प्रकटती हैं देह धरातल पर जहाँ से...
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