मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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बुधवार, जुलाई 4

अब राज छिपा कब तक रखे

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अब राज छिपा कब तक रखे कब अपना घूंघट खोलेगा कब हमसे भी तू बोलेगा, राधा का तू मीरा का भी कब अपने सँग भी डोलेगा ! अब राज छ...
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सोमवार, जून 13

कुदरत न घूंघट खोलती

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कुदरत न घूंघट खोलती   जो घट रहा सब स्वप्न है क्यों दिल जलाते हो यहाँ, जो दिख रहा वह है नहीं क्यों घर सजाते हो यहाँ ! है ओस की एक बूंद जो...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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