मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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शुक्रवार, जुलाई 12

चाह

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चाह  वह तैरना चाहती है नीले स्वच्छ जल में  मीन की भाँति  (पर जल अब विमल शेष ही कहाँ है ?) वह दौड़ाना चाहती है सर्राटे से  कार भीड़ भरी सड़को...
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शुक्रवार, अप्रैल 13

दिल्ली की एक सुबह

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दो दिनों के लिये हम दिल्ली में थे, कैंटोनमेंट एरिया में आर्मी कैंटीन के पास स्थित मेरे भाई के सरकारी आवास में ठहरे थे. सुबह बालकनी में बैठ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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