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सोमवार, नवंबर 19
पारिजात क्यों झर जाते हैं
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फूलों, रंगों, झरनों वाले, क्यों भाते हैं गीत तू बसता है इनमें स्वयं ही, तू जो सबका मीत ! कुहू कुहू कूजन वूजन सब तुझसे...
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