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सोमवार, अक्टूबर 11

हम डाकिये

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हम डाकिये जो भी जिसने जग में पाया एक उसी स्रोत से आया सदा मुक्त हो उसे लुटायें क्यों न हम डाकिये बन जाएँ ? झोली कभी न होगी खाली छिपा...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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