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डाकिये
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सोमवार, अक्टूबर 11
हम डाकिये
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हम डाकिये जो भी जिसने जग में पाया एक उसी स्रोत से आया सदा मुक्त हो उसे लुटायें क्यों न हम डाकिये बन जाएँ ? झोली कभी न होगी खाली छिपा...
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