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गुरुवार, सितंबर 29

चलो घर चलते हैं

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चलो घर चलते हैं बहुत देख लिए दुनिया के रंग ढंग छूट ही जाता है यहाँ हर संग चलो घर चलते हैं... बज रहे हैं जहां ढोल और मृदंग ! कभी शहनाई का स...
14 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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