मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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गुरुवार, जून 4

ग्लेशियर पिघल रहे हैं

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ग्लेशियर पिघल रहे हैं  धरती के दोनों ध्रुवों पर पर बसने वाले  छोटे-छोटे मुल्कों को  झेलनी पड़ रही है सजा  उस जुर्म की, जो उन्होंने किया ही न...
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शुक्रवार, दिसंबर 23

अरूप

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अरूप वह जो अरूप है भीतर  अकारण सुख है  उसकी मुस्कान थिर है  चिर बसंत छाया रहता है उसके इर्दगिर्द  अनहद राग बजता है अहर्निश  जगत से उपराम हुआ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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