मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
नीड़
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नीड़
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मंगलवार, अप्रैल 15
खो गये वे शब्द सारे
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खो गये वे शब्द सारे खो गये वे शब्द सारे नाव हम जिनकी बनाकर पहुँच जाते थे किनारे ! अब यहाँ लहरें व हम हैं डूबने में कहाँ ग़म है, छू लिय...
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गुरुवार, अप्रैल 28
नीड़ बनाना चाहे चिड़िया
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नीड़ बनाना चाहे चिड़िया जाने बनी है किस माटी की बड़ी हठीली, जिद की पक्की, नन्हीं जान बड़ी फुर्तीली लगती है थोड़ी सी झक्की ! सूखे पत्ते, घा...
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