मन पाए विश्राम जहाँ
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पांखुरी
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पांखुरी
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शुक्रवार, जुलाई 18
तो खिलेगी पाँखुरी
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तो खिलेगी पाँखुरी बांस की इक पोंगरी हम तुम बजाओ, तो बनेगी बांसुरी एक बिखरा गीत जैसे इक अधूरी सी कहानी क्रम नहीं सतरों ...
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सोमवार, जून 27
फूल
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फूल फूल, बस खिलना जानता है ! उसे शुभ घड़ी, शुभ दिन की चाह नहीं सम्पूर्ण हो जाने के बाद वह खुदबखुद आँखें खोल देता है... पांखुरी-पांखुरी ...
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