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रविवार, दिसंबर 4
तेरे सिवा कोई और कहाँ है
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तेरे सिवा कोई और कहाँ है बन जाऊँ मैं तेरी बांसुरी तेरे गीतों को जन्माऊँ, तू ही झलक-झलक जाये फिर मन दर्पण को यूँ चमकाऊँ ! प्रस्तर में ज्य...
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