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रविवार, दिसंबर 4

तेरे सिवा कोई और कहाँ है

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तेरे सिवा कोई और कहाँ है बन जाऊँ मैं तेरी बांसुरी तेरे गीतों को जन्माऊँ, तू ही झलक-झलक जाये फिर मन दर्पण को यूँ चमकाऊँ ! प्रस्तर में ज्य...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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