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भीष्म
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भीष्म
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बुधवार, अप्रैल 19
अनजाने गह्वर भीतर हैं
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अनजाने गह्वर भीतर हैं पल-पल बदल रहा है जीवन क्षण-क्षण सरक रही हैं श्वासें, सृष्टि चक्र अविरत चलता है किन्तु न हम ये राज भुला दें ...
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