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शुक्रवार, सितंबर 7

तू अंतर को प्रेम से भर ले

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तू अंतर को प्रेम से भर ले व्यर्थ ही तू क्यों चिंता करता तेरे लिए तो मैं हूँ ना, तू अंतर को प्रेम से भर ले कुछ अप्राप्य रहेग...
4 टिप्‍पणियां:
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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