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बुधवार, मई 15

उस सन्नाटे के पीछे तब

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उस सन्नाटे के पीछे तब जहाँ शब्द साथ न देते हों  जब सूना-सूना अंबर हो,  घन का कतरा भी नहीं एक    जो ढक लेता है सूरज को ! उस ख़ालीपन को जो भर ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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