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मदिरा
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बुधवार, मई 15
उस सन्नाटे के पीछे तब
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उस सन्नाटे के पीछे तब जहाँ शब्द साथ न देते हों जब सूना-सूना अंबर हो, घन का कतरा भी नहीं एक जो ढक लेता है सूरज को ! उस ख़ालीपन को जो भर ...
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