नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
उस सन्नाटे के पीछे तब
जहाँ शब्द साथ न देते हों
जब सूना-सूना अंबर हो,
घन का कतरा भी नहीं एक
जो ढक लेता है सूरज को !
उस ख़ालीपन को जो भर दें
भावों का भी अभाव लगता,
जाकर उस अनाम से मिलना !
पीता कोई भर-भर प्याला
जीवन की मदिरा है बँटती,
खड़ा उजाला चंद कदम पर
हो रात अँधेरी कितनी भी !