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शनिवार, फ़रवरी 8

बहने दो

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बहने दो बहने दो पावन रसधार, मत रोको ! झरने दो सजल अश्रुधार, मत टोको माना मन परिचित है बंधन से डरता है अनहद की गुंजन से खिलने दो अन्त...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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