मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
लहरें
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लहरें
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सोमवार, जून 3
अपने आप
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अपने आप सुबह आँख खुलते ही झलक जाता है संसार भीतर कानों में गूँजती है कोयल की कूक हवा का स्पर्श सहला जाता है गाल को आहिस...
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शुक्रवार, अप्रैल 19
रत्नाकर की थाह कौन ले
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रत्नाकर की थाह कौन ले सागर ने जिस क्षण से स्वयं को लहरें होना मान लिया, बनना, मिटना, आहत होना उस पल से ही ठान लिय...
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बुधवार, जून 22
तीन मुक्तक
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तीन मुक्तक सागर और लहरें लहरों को सबने देखा है सागर दिखता किसी एक को, पार गया जो इन लहरों से सागर मिलता उसी नेक को ! खुद बोझ उठाये है य...
8 टिप्पणियां:
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