मन पाए विश्राम जहाँ
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बुधवार, अप्रैल 13
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वह कभी भोर होकर भी भोर नहीं होती घटटोप बादलों से आवृत हो जाता है नील नभ अंशुमान मेघों की अनेक परतों के पीछे पंछी देर तक दुबके रहते ह...
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