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बुधवार, अप्रैल 13

वह

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वह   कभी भोर होकर भी  भोर नहीं होती  घटटोप बादलों से  आवृत हो जाता है नील  नभ  अंशुमान मेघों की अनेक परतों के पीछे  पंछी देर तक दुबके रहते ह...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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