मन पाए विश्राम जहाँ
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विदाई
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रविवार, जून 23
सत्य
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सत्य ‘मैं’ तुममें विलीन हो जाये यही चाह होती है प्रेम की यही चाह लघु मन की है जो विशाल मन में डुबाना चाहता है ख़ुद को अनंत में खोकर अपन...
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सोमवार, फ़रवरी 18
विदाई समारोह
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यह कविता मैंने इवा जी के लिए लिखी है, जिनका विदाई समारोह इसी हफ्ते हमारे क्लब में होने जा रहा है, वह एक शिक्षिका हैं और मेरा पुत्र भी उन...
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