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सोमवार, दिसंबर 23
मन इक बगिया सा खिल जाता
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मन इक बगिया सा खिल जाता निज के मुखड़े पर धूल लगी दर्पण को दोष दिए जाते हिंसा जब मन में बसती हो अवसर भी उसके मिल जाते स्वीका...
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