मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
विहग
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
विहग
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, दिसंबर 6
सुदूर कहीं ज्योति की नगरी
›
सुदूर कहीं ज्योति की नगरी झांक रहा कोई भीतर से भारी पर्दे क्यों लटकाए, बाहर अबद्ध गगन बुलाता पिंजरे में विहग घबराए ! विमुक्त करो मान...
12 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें