मन पाए विश्राम जहाँ

नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !

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सोमवार, जुलाई 18

जब याद कमल सर खिलता है

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जब याद कमल सर खिलता है तू हर उस पल में मिलता है  जब याद कमल सर खिलता है,  नहीं अतीत न भावी में ही  दर्पण दर्शन का मिलता है ! मन जो नित भागा ...
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बुधवार, नवंबर 11

कुछ ख्याल

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कुछ ख्याल   हजार राहे हैं जिनसे गुजर के तू मिलता है  किसी बाग में कमल कभी गुलाब बना खिलता है  हरेक मुट्ठी में कैद है एक आसमां अपना  जब जो ख्...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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