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शनिवार, फ़रवरी 12

तुम हो

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तुम हो  तुम हो, तभी तो  फूल खिलते हैं  मौसम बहारों के   लौट आते  तितलियाँ मंडराती हैं और  कूजती है कोकिल अमराई में  सुना ना तुमने ! तुम हो, ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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