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सोमवार, जुलाई 4

अनजानी राहों से आकर

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अनजानी राहों से आकर  एक बात भूली बिसरी सी  एक स्वपन चिर काल पुराना, एक तंतु जो जोड़े तुझ से  मधुरिम स्मृति की बहती धारा ! कोई  है जो छिपा हुआ...
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Anita
यह अनंत सृष्टि एक रहस्य का आवरण ओढ़े हुए है, काव्य में यह शक्ति है कि उस रहस्य को उजागर करे या उसे और भी घना कर दे! लिखना मेरे लिये सत्य के निकट आने का प्रयास है.
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