मन पाए विश्राम जहाँ
नए वर्ष में नए नाम के साथ प्रस्तुत है यह ब्लॉग !
स्वाद
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स्वाद
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शनिवार, अक्टूबर 3
खोकर ही पा सकता कोई
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खोकर ही पा सकता कोई अपने भीतर उतर सको तो स्वाद स्वयं का अगर छको तो, अंत नहीं पाओगे उसका मन-राहों से गुजर सको तो ! मीठी-मीठी सी इक पीड़ा ...
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मंगलवार, जून 11
मन से कुछ बातें
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मन से कुछ बातें कितने दिन और यहाँ घूमोगे , गाओगे भटके हो बार-बार कब तक झुठलाओगे ? एक न एक.. दिन घर तो आओगे ! स्वाद लिए ...
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बुधवार, जनवरी 27
किसने रोका है पथ अपना
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किसने रोका है पथ अपना वैसे ही हो जाते हैं हम जैसा होना सदा चाहते, फूलों से खिल सकते इस क्षण नेह सुवास यदि बिखराते ! स्रो...
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