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रविवार, मार्च 27
सुरमई शाम
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सुरमई शाम ढल रही है शाम ऐसे इक मधुर सुस्व्प्न जैसे ! नील अम्बर मुग्ध तकता बादलों के पार हँसता, तैरते हैं कुछ विहग लें आखिरी उड़ान खग ! वृक्ष...
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